IGNOU BPYC-108 समकालीन पाश्चात्य दर्शन · BAFPY · TEE दिसंबर 2026 / जून 2027
बीपीवाईसी-108: समकालीन पाश्चात्य दर्शन IGNOU के BAFPY (दर्शनशास्त्र) कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम है। इसमें 19वीं
शताब्दी के उत्तरार्ध से लेकर समकालीन समय तक पाश्चात्य दर्शन में हुए प्रमुख
विकासों का अध्ययन किया जाता है।
यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को घटना-विज्ञान (Phenomenology), अस्तित्ववाद (Existentialism), विश्लेषणात्मक दर्शन (Analytic Philosophy), तार्किक प्रत्यक्षवाद (Logical Positivism), सामान्य भाषा दर्शन (Ordinary Language Philosophy) और उत्तर-आधुनिकतावाद (Postmodernism) जैसे प्रमुख दार्शनिक आंदोलनों को समझने में सहायता करता है।
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कार्यक्रम |
पाठ्यक्रम
कोड |
पाठ्यक्रम
का नाम |
लागू
सत्र |
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BAFPY (दर्शनशास्त्र) |
BPYC-108 |
समकालीन पाश्चात्य दर्शन |
TEE दिसंबर 2026
/ TEE जून 2027 |
बीपीवाईसी-108 में अध्ययन के प्रमुख क्षेत्र:
1. शास्त्रीय तत्त्वमीमांसा का संकट
नीत्शे द्वारा पारंपरिक दर्शन, मूल्यों और सत्य की अवधारणाओं की आलोचना तथा आधुनिक दर्शन में
आए परिवर्तन को समझना।
2. घटना-विज्ञान (Phenomenology)
एडमंड हुसर्ल की एपोखे (Epoché) या कोष्ठकीकरण (Bracketing) की पद्धति तथा चेतन अनुभव के प्रत्यक्ष
अध्ययन को समझना।
3. अस्तित्ववाद (Existentialism)
स्वतंत्रता, प्रामाणिकता, व्याकुलता (Angst) और "अस्तित्व
सार से पहले है" जैसे प्रमुख विचारों का अध्ययन।
कीर्केगार्द, हाइडेगर और सार्त्र जैसे दार्शनिकों के विचारों
को समझना।
4. विश्लेषणात्मक दर्शन और तार्किक प्रत्यक्षवाद
भाषा, तर्क और सत्यापन सिद्धांत (Verification
Principle) पर जोर तथा रसेल और प्रारंभिक विट्गेंश्टाइन के
विचारों का अध्ययन।
5. उत्तरवर्ती विट्गेंश्टाइन और सामान्य भाषा दर्शन
विट्गेंश्टाइन के प्रारंभिक और उत्तरवर्ती दर्शन के बीच अंतर तथा भाषा-खेल
(Language-Games) और अर्थ-प्रयोग सिद्धांत (Meaning
as Use) को समझना।
6. उत्तर-आधुनिक आलोचना (Postmodern Critique)
फूको, देरिदा और ल्योटार जैसे
विचारकों के माध्यम से महावृत्तांतों (Grand Narratives), सार्वभौमिक सत्य और वस्तुनिष्ठ ज्ञान की आलोचना
को समझना।
IGNOU बीपीवाईसी-108 समकालीन पाश्चात्य दर्शन | असाइनमेंट 2026–27
टिप्पणीः
1. सभी पाँच प्रश्नों के उत्तर दें।
2. सभी पाँच प्रश्नों के अंक बराबर हैं।
3. प्रश्न 1 और 2 के उत्तर लगभग 400 शब्दों में
दें।
1. महाद्वीपीय दर्शन की मुख्य
विशेषताओं पर चर्चा करें। बताएं कि यह विश्लेषणात्मक दर्शन से कैसे अलग है।
या
समकालीन पाश्चात्य दर्शन की
मुख्य विशेषताओं की जाँच करें। विश्लेषणात्मक और महाद्वीपीय परंपराओं के उदय और
महत्व पर चर्चा करें।
2. 'इंटेन्शनैलिटी' (इरादे / सोद्देश्यता) और 'इपोखे' (निलंबन) के विशेष संदर्भ में
हुसर्ल के फेनोमेनोलॉजी (घटना-विज्ञान) को समझाएं।
या
हाइडेगर के 'मानव अस्तित्व' / दासाइन (Dasein) की अवधारणा की आलोचनात्मक जाँच
करें और अस्तित्ववादी दर्शन में इसके महत्व को समझाएं।
3. नीचे दिए गए प्रश्नों में से
किन्हीं दो के उत्तर लगभग 200 शब्दों में दें।
a) कार्ल मार्क्स की 'अलगाव' (Alienation) और 'ऐतिहासिक भौतिकवाद' की अवधारणा पर चर्चा करें।
b) पारंपरिक नैतिकता की नीत्शे की आलोचना और
"ईश्वर की मृत्यु" की अवधारणा को समझाएं।
c) इड (Id), ईगो (Ego) और सुपर-ईगो (Superego) के संदर्भ में फ्रायड के अचेतन (unconscious) के सिद्धांत की जाँच करें।
d) आलोचनात्मक सिद्धांत (क्रिटिकल थ्योरी) के
मुख्य सिद्धांतों पर चर्चा करें और फ्रैंकफर्ट स्कूल के योगदान का मूल्यांकन करें।
4. नीचे दिए गए प्रश्नों में से किन्हीं चार के
उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें।
a) फर्डिनेंड डी सॉसर के संदर्भ में संरचनावाद (Structuralism) को समझाएं।
b) संरचनावाद और उत्तर-संरचनावाद (Post-Structuralism) के बीच अंतर बताएं।
c) गैडमर की व्याख्या-शास्त्र (हर्मेन्यूटिक्स)
की अवधारणा पर टिप्पणी लिखें।
d) विट्गेन्स्टाइन के अर्थ के 'चित्र सिद्धांत' (पिक्चर थ्योरी) को समझाएं।
e) रसेल के तार्किक परमाणुवाद (लॉजिकल
एटॉमिज़्म) पर टिप्पणी लिखें।
f) विलियम जेम्स के प्रयोजनवाद (Pragmatism) के सिद्धांत पर चर्चा करें।
5. नीचे दिए गए विषयों में से किन्हीं पाँच पर
लगभग 100 शब्दों में संक्षिप्त टिप्पणी
लिखें।
a) अलगावपूर्ण श्रम (Alienated Labour)
b) शक्ति की इच्छा (Will to Power)
c) दासाइन (Dasein)
d) अंतर (Difference/Différance)
e) तार्किक प्रत्यक्षवाद (Logical Positivism)
f) सत्यापन सिद्धांत (Verification Principle)
g) साधारण भाषा दर्शन (Ordinary Language Philosophy)
h) संवादात्मक तर्कसंगतता (Communicative Rationality)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न FAQs
प्रश्न 1. BPYC-108 क्या है?
उत्तर: BPYC-108, IGNOU के BAFPY
(दर्शनशास्त्र) कार्यक्रम का एक पाठ्यक्रम है, जिसका नाम समकालीन पाश्चात्य दर्शन है।
प्रश्न 2. BPYC-108 में कौन-कौन से विषय शामिल हैं?
उत्तर: इस पाठ्यक्रम में नीत्शे,
हुसर्ल, कीर्केगार्द, हाइडेगर,
सार्त्र, रसेल, विट्गेंश्टाइन,
फूको, देरिदा और ल्योटार जैसे प्रमुख
दार्शनिकों तथा विभिन्न दार्शनिक आंदोलनों का अध्ययन किया जाता है।
प्रश्न 3. समकालीन पाश्चात्य दर्शन का मुख्य विषय क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य विषय 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से पाश्चात्य दर्शन में हुए विकासों का अध्ययन
करना है, विशेष रूप से पारंपरिक तत्त्वमीमांसा से घटना-विज्ञान,
अस्तित्ववाद, विश्लेषणात्मक दर्शन और
उत्तर-आधुनिकतावाद की ओर हुए परिवर्तन को समझना।
प्रश्न 4. BPYC-108 का अध्ययन क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: BPYC-108 विद्यार्थियों को
समकालीन पाश्चात्य दर्शन के प्रमुख विकासों को समझने और अस्तित्व,
चेतना, भाषा, सत्य,
ज्ञान और वास्तविकता से जुड़े महत्वपूर्ण
दार्शनिक प्रश्नों का आलोचनात्मक अध्ययन करने में सहायता करता है।
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