Wednesday, September 15, 2021

विकास के उदारवादी परिप्रेक्ष्य का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए


विकास के उदारवादी परिप्रेक्ष्य का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए

उदारवाद की पृष्ठभूमि :

§  उदारवाद एक राजनीतिक और नैतिक दर्शन है जो स्वतंत्रता, शासित की सहमति और कानून के समक्ष समानता पर आधारित है।

§  उदारवाद आमतौर पर सीमित सरकार, व्यक्तिगत अधिकारों (नागरिक अधिकारों और मानवाधिकारों सहित), पूंजीवाद (मुक्त बाज़ार ), लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, लिंग समानता, नस्लीय समानता और अंतर्राष्ट्रीयता का समर्थन करता है।

§  उदारवाद के मुख्यतः तीन पक्ष हैं:

1.     आर्थिक उदारवाद: इसमें मुक्त प्रतिस्पर्द्धा, स्व-विनियमित बाज़ार, न्यूनतम राज्य हस्तक्षेप और वैश्वीकरण इत्यादि विशेषताएँ शामिल हैं।

 

2.     राजनीतिक उदारवाद में प्रगति में विश्वास, मानव की अनिवार्य अच्छाई, व्यक्ति की स्वायत्तता और राजनीतिक तथा नागरिक स्वतंत्रता शामिल है।

 

3.     सामाजिक उदारवाद के अंतर्गत अल्पसंख्यक समूहों के संरक्षण से जुड़े मुद्दे, समलैंगिक विवाह और LGBTQ से संबंधित मुद्दे आते हैं।

§  प्रबोधन काल (Age of Enlightenment) के बाद से पश्चिम में दार्शनिकों और अर्थशास्त्रियों के बीच उदारवाद लोकप्रिय हुआ था।

§  उदारवाद ने वंशानुगत विशेषाधिकार, राज्य धर्म, पूर्ण राजतंत्र, राजाओं के दिव्य अधिकारों जैसे पारंपरिक रूढ़िवादी मानदंडों को प्रतिनिधि लोकतंत्र और कानून के शासन के माध्यम से रूपांतरित करने की मांग की थी।

§  उदारवादियों ने व्यापारिक नीतियों को आसान बनाने, शाही एकाधिकार और व्यापार हेतु अन्य बाधाओं को समाप्त करने की मांग की थी।

उदारवाद का वर्तमान स्वरूप:

§  रूस के अतिरिक्त भारत, चीन, तुर्की, ब्राज़ील, फिलीपींस और यहांँ तक ​​कि यूरोप में भी अब अत्यधिक केंद्रीकृत राजनीतिक प्रणालियांँ प्रचलित हो रही हैं जो उदारवाद की सामान्य विशेषताओं का विरोध कर रही हैं।

§  वर्तमान में इस प्रकार की प्रणालियों के समर्थक मानते हैं कि राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक प्रगति के लिये उदारवादी लोकतंत्र की तुलना में ये प्रणालियांँ बेहतर तरीके से काम कर रही हैं।

§  द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद उदारवाद पश्चिम में प्रमुख सामाजिक-राजनीतिक विचारधारा रहा है लेकिन हाल ही में पश्चिम में भी उदारवाद की स्थिति में गिरावट देखी जा रही है।

§  ब्रिटेन में ब्रेक्ज़िट का जनता द्वारा समर्थन, अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों का समर्थन, हंगरी के राष्ट्रपति विक्टर ऑर्बन और पूर्व इतालवी उपप्रधानमंत्री माटेओ साल्विनी की लोकप्रियता यह प्रदर्शित करती है कि पश्चिम के समाज में भी प्रचलित मूल उदारवाद के स्वरूप में अब परिवर्तन रहा है।

§  अमेरिका की नई प्रवासी नीतियों के माध्यम से प्रवासियों को अमेरिका में प्रवेश से रोका जा रहा है साथ ही जर्मनी द्वारा शरणार्थियों को स्वीकार करने की नीतियों से गलत परिणाम निकलने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

§  पोलैंड और हंगरी हिंसा एवं युद्ध से भागे शरणार्थियों के प्रवेश के पक्ष में नहीं हैं तथा लगभग सभी यूरोपीय संघ के सदस्यों का मानना है कि यूरोपीय संघ में शरणार्थियों के प्रवेश से यूरोप के पूर्ण एकीकरण की योजना बुरी तरह प्रभावित होगी।

§  समलैंगिक विवाह को केवल कुछ देशों द्वारा ही मान्यता दी जा रही है, दूसरी ओर समलैंगिकता हेतु कई देशों में मौत की सज़ा का प्रावधान है। LGBTQ (Lesbian, Gay, Bisexual, Transgender, QUEER) के अधिकारों में बहुत धीमी प्रगति देखी जा रही है, जबकि अब यह सिद्ध हो चुका है कि इस प्रकार के लोगों की शारीरिक संरचना प्रकृति द्वारा निर्धारित होती है।

§  कई देशों द्वारा पर्यावरण हित के विरुद्ध नीतियाँ बनाई जा रही हैं इसमें स्वयं के संकीर्ण हितों को वैश्विक जलवायु परिवर्तन से ज़्यादा प्राथमिकता दी जा रही है। हाल ही में ब्राज़ील के वनों में लगी आग हेतु सरकार की नीतियों को ज़िम्मेदार बताया जा रहा है।

§  पर्यावरण संबंधी अभिसमयों की प्रकृति गैर-बाध्यकारी होने के कारण कई देश इस प्रकार के अभिसमयों से अलग होते जा रहे हैं। पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका का अलग होना संरक्षणवादी नीतियों को प्रदर्शित करता है।

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