The Personal MBA | डिग्री के बिना बिज़नेस की समझ Chapterwise
Summary in Hindi
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि बिजनेस के लिए एमबीए की डिग्री या भारी जारगॉन (Jargon) जरूरी है। लेकिन लेखक के अनुसार, बिजनेस असल में एक ह्यूमन स्किल है। यह उन लोगों के लिए है जो दुनिया में वैल्यू (मूल्य) पैदा करना चाहते हैं। बिजनेस के 5 प्रमुख स्तंभ हैं: वैल्यू क्रिएशन, मार्केटिंग, सेल्स, वैल्यू डिलीवरी और फाइनेंस।
अध्याय 1: वैल्यू क्रिएशन (Value Creation)
"बिना मूल्य के कोई बिजनेस नहीं होता।"
बिजनेस की शुरुआत पैसे से नहीं, बल्कि वैल्यू (मूल्य) से होती है। यदि
आप किसी की समस्या हल नहीं कर रहे हैं, तो
आप बिजनेस नहीं कर रहे हैं,
आप बस एक शौक (Hobby) पाल रहे हैं।
1.1 मानवीय आवश्यकताओं के 5 चालक (The 5 Core Human Drives)
लेखक जोश कौफमैन कहते हैं कि दुनिया का हर सफल
बिजनेस इंसान की इन 5 बुनियादी इच्छाओं में से कम से कम एक
को पूरा करता है:
प्राप्ति की इच्छा (Drive to Acquire): भौतिक वस्तुओं, प्रतिष्ठा या शक्ति को पाने की इच्छा।
उदाहरण: रिटेल स्टोर्स, ज्वेलरी, या लग्जरी कार कंपनियां इस इच्छा को पूरा करती हैं।
जुड़ने की इच्छा (Drive to Bond): प्यार, दोस्ती और सामाजिक स्वीकार्यता की तलाश।
उदाहरण: Facebook, Tinder, या क्लब्स। लोग पैसे खर्च करते हैं ताकि वे अकेला महसूस न करें।
सीखने की इच्छा (Drive to Learn): जिज्ञासा शांत करना और ज्ञान बढ़ाना।
उदाहरण: किताबें, वर्कशॉप्स, और ऑनलाइन कोर्सेज।
रक्षा की इच्छा (Drive to Defend): खुद को, अपने परिवार और अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखने की भावना।
उदाहरण: होम सिक्योरिटी सिस्टम, इंश्योरेंस, और कानूनी सेवाएं।
अनुभव की इच्छा (Drive to Feel): मनोरंजन, उत्तेजना और भावनात्मक सुख।
उदाहरण: मूवी थिएटर, रेस्टोरेंट, और स्पोर्ट्स इवेंट्स।
1.2 वैल्यू के 12
रूप (12 Standard
Forms of Value)
वैल्यू सिर्फ सामान बेचना नहीं है। जोश कौफमैन
ने वैल्यू प्रदान करने के 12 तरीके बताए हैं:
Product: एक भौतिक वस्तु बनाना और बेचना।
Service: किसी के लिए कोई काम करना (जैसे: सैलून या क्लीनिंग)।
Shared Resource: एक संपत्ति बनाना जिसे कई लोग इस्तेमाल करें (जैसे: जिम या
म्यूजियम)।
Subscription: नियमित एक्सेस के लिए बार-बार शुल्क लेना (जैसे: Netflix)।
Resale: किसी और से खरीदकर ऊंचे दाम पर बेचना (जैसे: होलसेल)।
Lease/Rent: अस्थायी रूप से इस्तेमाल के लिए देना।
Insurance: भविष्य के जोखिम के खिलाफ सुरक्षा बेचना।
Capital: पैसा उधार देना और ब्याज कमाना।
Option: किसी काम को करने का अधिकार बेचना (जैसे: स्टॉक ऑप्शंस)।
1.3 फीडबैक लूप और प्रोटोटाइपिंग (The Feedback Loop)
अक्सर लोग महीनों तक कमरे में बंद होकर 'परफेक्ट' प्रोडक्ट बनाने की कोशिश करते हैं। लेखक इसे सबसे बड़ी गलती मानते
हैं।
MVP (Minimum Viable Product): सबसे सरल मॉडल बनाएं जो काम करता हो।
Iterate (दोहराव): ग्राहकों को दिखाएं, उनकी
प्रतिक्रिया (Feedback) लें और सुधारें। यह चक्र तब तक चलाएं
जब तक ग्राहक उसे खरीदने को तैयार न हो जाए।
अध्याय 2: मार्केटिंग (Marketing)
"मार्केटिंग का अर्थ है सही लोगों का ध्यान खींचना।"
मार्केटिंग वह कला है जिससे संभावित ग्राहकों (Prospects) को पता चलता है कि आपके पास उनकी
समस्या का समाधान है।
2.1 अटेंशन (Attention) ही असली करेंसी है
आज के शोर-शराबे वाले युग में लोगों का 'ध्यान' सबसे दुर्लभ चीज है। मार्केटिंग में आप विज्ञापन नहीं बेचते, आप अटेंशन खरीदते हैं।
अटेंशन का नियम: यदि ग्राहक आपकी ओर नहीं देख
रहा है, तो वह आपसे कभी नहीं खरीदेगा।
रिसेप्टिविटी (Receptivity): लोग तभी ध्यान देते हैं जब उन्हें उसकी जरूरत
होती है। उदाहरण के लिए, आधी रात को लगी भूख के समय खाने का
विज्ञापन सबसे ज्यादा प्रभावी होता है।
2.2 'हुक'
(The Hook) और
मैसेजिंग
एक अच्छी मार्केटिंग कैंपेन में एक जबरदस्त 'हुक' होना चाहिए। हुक वह विचार या वाक्य है जो ग्राहक को रुकने पर मजबूर
कर दे।
लाभ (Benefit) बनाम विशेषता (Feature): ग्राहक
को इस बात से मतलब नहीं है कि आपके फोन में "X10 प्रोसेसर" है (यह विशेषता है)। उसे इस बात से मतलब है कि
"यह फोन कभी हैंग नहीं होगा" (यह लाभ है)। हमेशा लाभ बेचें।
2.3 संशय हटाना और विश्वास (Reducing Friction)
मार्केटिंग का एक बड़ा हिस्सा है ग्राहक के डर
को दूर करना।
सोशल प्रूफ (Social Proof): लोग वह खरीदते हैं जिसे दूसरे लोग खरीद रहे
हैं। टेस्टिमोनियल्स और रिव्यूज मार्केटिंग के सबसे शक्तिशाली हथियार हैं।
फ्री सैंपल्स: "पहले इस्तेमाल करें, फिर विश्वास करें" वाली नीति। जब
ग्राहक कुछ फ्री में ट्राई करता है, तो
उसके खरीदने की संभावना बढ़ जाती है।
2.4 विजुअलाइजेशन (Visualization)
प्रभावशाली मार्केटिंग ग्राहक को यह
"महसूस" कराती है कि प्रोडक्ट खरीदने के बाद उनकी जिंदगी कैसी दिखेगी।
उदाहरण: कार का विज्ञापन ड्राइविंग के आनंद और
स्टेटस को दिखाता है, न कि सिर्फ कार के पुर्जों को।
इन दो अध्यायों का गहरा निष्कर्ष
वैल्यू क्रिएशन (अध्याय 1) आपको "क्या बनाना है" यह
सिखाता है, और मार्केटिंग (अध्याय 2) आपको "किसे और कैसे बताना
है" यह सिखाता है।
यदि आप इन दो अध्यायों को मास्टर कर लेते हैं, तो आपका बिजनेस आधा सफल हो चुका है।
वैल्यू के बिना मार्केटिंग "धोखा" है, और मार्केटिंग के बिना वैल्यू "अदृश्य" है।
अध्याय 3: सेल्स (Sales) - विश्वास और लेनदेन का विज्ञान
मुख्य विचार: मार्केटिंग से लोग आपके पास आते
हैं, लेकिन सेल्स वह प्रक्रिया है जहाँ 'संभावित ग्राहक' (Prospect) एक 'वास्तविक ग्राहक' में
बदलता है।
3.1 विश्वास का निर्माण (The Trust Factor)
सेल्स कोई चालाकी नहीं है, बल्कि यह विश्वास (Trust) बनाने का काम है। कोई भी व्यक्ति तब तक
अपना बटुआ नहीं खोलता जब तक उसे यह यकीन न हो जाए कि उसे मिलने वाली वैल्यू उसके
द्वारा दिए गए पैसों से अधिक है।
परामर्शदाता बनें (Consultative Selling): एक अच्छा सेल्सपर्सन चीज़ें 'बेचता' नहीं है, बल्कि वह एक डॉक्टर की तरह समस्या का
निदान करता है। ग्राहक को महसूस होना चाहिए कि आप उनकी मदद कर रहे हैं, न कि अपनी जेब भर रहे हैं।
3.2 बाधाओं को दूर करना (Overcoming Objections)
हर सेल में ग्राहक के मन में कुछ
"अवरोध" (Friction)
होते हैं। मुख्य रूप से 4 बाधाएँ होती हैं:
पैसा: "यह बहुत महंगा है।"
समय: "मेरे पास अभी इसके लिए वक्त नहीं
है।"
जरूरत: "मुझे नहीं लगता कि मुझे इसकी
जरूरत है।"
विश्वास: "क्या यह सच में काम करेगा?"
समाधान: सेल्स की प्रक्रिया इन शंकाओं का उत्तर
पहले ही दे देने के बारे में है। जैसे 'मनी-बैक
गारंटी' विश्वास की बाधा को खत्म करती है।
3.3 कीमत बनाम मूल्य (Price vs Value)
कीमत वह है जो आप चुकाते हैं, मूल्य (Value) वह है जो आपको मिलता है।
Value-Based Pricing: अपने उत्पाद की कीमत इस आधार पर न रखें कि उसे
बनाने में कितना खर्च आया,
बल्कि इस आधार पर रखें कि वह ग्राहक का
कितना फायदा करा रहा है या कितना समय बचा रहा है।
3.4 सेल्स फनल (The Sales Funnel)
हर कोई जो आपकी मार्केटिंग देखता है, वह खरीदारी नहीं करेगा। सेल्स एक नंबर
गेम है। आपको यह समझना होगा कि कितने लोगों ने विज्ञापन देखा, कितने लोगों ने पूछताछ की और अंत में
कितने लोगों ने पेमेंट की।
अध्याय 4: वैल्यू डिलीवरी (Value Delivery) - वादे को पूरा करना
मुख्य विचार: एक बार जब आप पैसे ले लेते हैं, तो आपकी असली जिम्मेदारी शुरू होती है।
अगर आप बेहतरीन अनुभव नहीं देते, तो
आपका बिजनेस कभी टिक नहीं पाएगा।
4.1 ग्राहक की खुशी (Customer Excellence)
बिजनेस की दुनिया में एक नियम है: "Under-promise and Over-deliver"
(वादा थोड़ा कम
करें और जरूरत से ज्यादा दें)।
अगर आप ग्राहक की उम्मीद से थोड़ा भी ज्यादा
देते हैं, तो वे आपके 'फैन' बन जाते हैं। खुश ग्राहक ही दोबारा आता है और दूसरों को भी बताता है
(Word of Mouth)।
4.2 सिस्टम और ऑटोमेशन (Systems & Scalability)
अगर आप खुद हर काम करेंगे, तो बिजनेस कभी बड़ा नहीं होगा। वैल्यू
डिलीवरी के लिए आपको सिस्टम (Systems) बनाने
होंगे।
सिस्टम का मतलब है कि आपके रहने या न रहने पर
भी ग्राहक को वही क्वालिटी मिले। जैसे McDonald's में हर बर्गर का स्वाद एक जैसा होता है क्योंकि उनके पास एक सेट
सिस्टम है।
4.3 क्वालिटी कंट्रोल (Quality Control)
डिलीवरी में निरंतरता (Consistency) सबसे जरूरी है। एक दिन बहुत अच्छी
सर्विस और दूसरे दिन खराब सर्विस बिजनेस को खत्म कर देती है। आपको अपनी प्रक्रिया
में ऐसी चेकलिस्ट बनानी चाहिए जो हर बार उच्च स्तर की गुणवत्ता सुनिश्चित करे।
4.4 फीडबैक लूप (The Feedback Loop)
वैल्यू देने के बाद ग्राहक से पूछना कि उन्हें
कैसा लगा, बहुत जरूरी है।
सुधार: ग्राहक की शिकायतें असल में आपके बिजनेस
को सुधारने के मुफ्त सुझाव हैं। जो बिजनेस फीडबैक नहीं लेता, वह समय के साथ पिछड़ जाता है।
अध्याय 5: फाइनेंस (Finance) - बिजनेस का हिसाब-किताब
"अगर आपका बिजनेस पैसा नहीं बना रहा, तो वह सिर्फ एक महंगा शौक (Hobby) है।"
बिजनेस में फाइनेंस का मतलब केवल अकाउंटिंग
नहीं है, बल्कि यह समझना है कि पैसा कहाँ से आ
रहा है, कहाँ जा रहा है और क्या यह भविष्य में
टिका रहेगा।
5.1 फाइनेंस के 4 मुख्य स्तंभ
किसी भी बिजनेस की वित्तीय स्थिति को समझने के
लिए ये 4 चीजें अनिवार्य हैं:
प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability): क्या आप खर्चों के बाद पैसा बचा रहे
हैं?
लिक्विडिटी (Liquidity): क्या आपके पास हाथ में नकद (Cash) है ताकि आप बिलों का भुगतान कर सकें?
एफिशिएंसी (Efficiency): आप अपनी पूंजी का कितनी अच्छी तरह इस्तेमाल कर
रहे हैं?
सॉल्वेंसी (Solvency): क्या आपका बिजनेस कर्ज में डूबा तो नहीं है?
5.2 प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin)
लेखक कहते हैं कि केवल 'रेवेन्यू' (कुल कमाई) देखना एक भ्रम है। असली चीज
मार्जिन है।
मार्कअप: लागत में जोड़ा गया पैसा।
मार्जिन: अंतिम बिक्री मूल्य का वह हिस्सा जो
आपका मुनाफा है।
सीख: यदि आपका रेवेन्यू 1 करोड़ है लेकिन मार्जिन 1% है, तो आपका बिजनेस बहुत जोखिम भरा है।
5.3 कैश फ्लो (Cash Flow) - बिजनेस का खून
कैश फ्लो और प्रॉफिट में फर्क होता है। आपके
पास कागजों पर 10 लाख का प्रॉफिट हो सकता है, लेकिन अगर ग्राहकों ने पैसा नहीं दिया
है, तो आपके पास सैलरी देने के लिए कैश
नहीं होगा।
कैश फ्लो स्टेटमेंट: यह देखना कि पैसा कब अंदर
आता है और कब बाहर जाता है।
टिप: अपने ग्राहकों से जल्दी पैसा लें और
वेंडर्स को थोड़ी देर से भुगतान करें।
5.4 निवेश पर प्रतिफल (ROI - Return on Investment)
बिजनेस में हर खर्चा एक निवेश होना चाहिए।
अगर आप ₹100
मार्केटिंग में डाल रहे हैं, तो
क्या वह आपको ₹200 वापस ला कर दे रहा है? यदि नहीं, तो वह खर्चा व्यर्थ है।
अध्याय 6: मानव मनोविज्ञान (The Human Mind)
"बिजनेस इंसानों द्वारा, इंसानों
के लिए किया जाता है।"
अगर आप यह नहीं समझते कि लोग निर्णय कैसे लेते
हैं, तो आप कभी एक अच्छे लीडर या मार्केटर
नहीं बन सकते।
6.1 ऊर्जा का संरक्षण (Energy Conservation)
इंसानी दिमाग जैविक रूप से ऊर्जा बचाने के लिए
बना है। इसलिए लोग स्वभाव से आलसी होते हैं और सबसे आसान रास्ता चुनते हैं।
बिजनेस एप्लीकेशन: आपका प्रोडक्ट जितना
सुविधाजनक (Convenient) होगा, लोग उसे उतना ही ज्यादा खरीदेंगे। अमेज़न की 'One-Click Buy' इसी मनोविज्ञान पर आधारित है।
6.2 धारणा और पूर्वाग्रह (Perceptual Errors)
हमारा दिमाग दुनिया को वैसा नहीं देखता जैसी वह
है, बल्कि वैसा देखता है जैसा वह 'सोचता' है।
सोशल प्रूफ (Social Proof): हम वही करते हैं जो बाकी सब कर रहे हैं। अगर
किसी दुकान पर भीड़ है, तो हम वहां जाना पसंद करेंगे।
स्कार्सिटी (Scarcity): जो चीज कम होती है, वह
कीमती लगती है। "Limited
Time Offer" इसी
वजह से काम करता है।
अथॉरिटी (Authority): लोग विशेषज्ञों की बात जल्दी मानते हैं।
6.3 नुकसान का डर (Loss Aversion)
मनोवैज्ञानिक रूप से ₹1000 खोने का गम, ₹1000 पाने की खुशी से कहीं ज्यादा बड़ा होता
है।
बिजनेस एप्लीकेशन: अपने ग्राहकों को यह न बताएं
कि उन्हें क्या 'मिलेगा', बल्कि यह बताएं कि आपके प्रोडक्ट के बिना वे क्या 'खो' रहे
हैं।
6.4 निर्णय लेने की थकान (Decision Fatigue)
जब इंसान को बहुत सारे विकल्प (Options) दिए जाते हैं, तो उसका दिमाग थक जाता है और वह कुछ भी
नहीं खरीदता।
सीख: अपने ग्राहकों को सीमित और स्पष्ट विकल्प
दें। भ्रम बिक्री का दुश्मन है।
अध्याय 7: स्वयं के साथ काम करना (Working with Yourself)
"आप अपने बिजनेस के सबसे महत्वपूर्ण 'एसेट'
(Asset) हैं।
अगर आप काम नहीं करेंगे, तो कुछ भी काम नहीं करेगा।"
जोश कौफमैन के अनुसार, उत्पादकता (Productivity) केवल ज्यादा काम करना नहीं है, बल्कि अपनी ऊर्जा का सही प्रबंधन करना
है।
7.1 ऊर्जा प्रबंधन बनाम समय प्रबंधन
लेखक कहते हैं कि समय सीमित है, लेकिन ऊर्जा घटती-बढ़ती रहती है।
जैविक लय (Biological Primetime): दिन का वह समय पहचानें जब आपका दिमाग सबसे तेज
चलता है (अक्सर सुबह)। सबसे कठिन और रचनात्मक काम उसी समय करें।
आराम का महत्व: बैटरी की तरह, आपको भी रिचार्ज होने की जरूरत है।
लगातार काम करने से "डिमिमिनिशिंग रिटर्न" (कम लाभ) मिलता है।
7.2 मल्टीटास्किंग का भ्रम (The Myth of Multitasking)
हमारा दिमाग एक बार में केवल एक ही जटिल कार्य
पर ध्यान केंद्रित कर सकता है।
कॉग्निटिव स्विचिंग पेनल्टी: जब आप एक काम
छोड़कर दूसरे पर जाते हैं,
तो दिमाग को दोबारा फोकस करने में समय
लगता है। इससे आपकी क्षमता 40% तक
कम हो सकती है।
समाधान: 'Batching' का उपयोग करें। सभी ईमेल एक साथ चेक करें, सभी कॉल एक साथ करें।
7.3 लक्ष्य निर्धारण और प्राथमिकता
द रूल ऑफ 3: एक
दिन में केवल 3 महत्वपूर्ण काम चुनें। अगर आप 20 काम की लिस्ट बनाएंगे, तो दिन के अंत में आप केवल थकान और
असफलता महसूस करेंगे।
न कहना सीखें: हर अवसर बिजनेस के लिए अच्छा
नहीं होता। अपनी ऊर्जा को केवल उन कार्यों पर लगाएं जो सीधे आपके मुख्य लक्ष्यों (Core Goals) से जुड़े हों।
अध्याय 8: दूसरों के साथ काम करना (Working with Others)
"अकेले आप तेज चल सकते हैं, लेकिन
साथ मिलकर आप दूर तक जा सकते हैं।"
बिजनेस का मतलब ही है लोगों का समूह। अध्याय 8 टीम वर्क, लीडरशिप और कम्युनिकेशन के बारे में
है।
8.1 संवाद का महत्व (Communication)
अस्पष्टता बिजनेस की सबसे बड़ी दुश्मन है।
साफ निर्देश: जब आप किसी को काम सौंपते हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि उन्हें
"क्या करना है" और "क्यों करना है" पूरी तरह साफ हो।
पुष्टि (Confirmation): निर्देश देने के बाद सामने वाले से पूछें कि उन्होंने क्या समझा।
8.2 प्रोत्साहन का नियम (Incentives)
इंसान वही काम करता है जिसके लिए उसे रिवॉर्ड
मिलता है।
गलत प्रोत्साहन के खतरे: अगर आप किसी सेल्स टीम
को केवल 'कॉल' करने के लिए पैसा देंगे, तो
वे ढेर सारी बेकार कॉल करेंगे। अगर आप उन्हें 'सेल' करने के लिए पैसा देंगे, तो वे क्वालिटी पर ध्यान देंगे।
संरेखण (Alignment): टीम के व्यक्तिगत लक्ष्यों को कंपनी के लक्ष्यों के साथ जोड़ें।
8.3 डेलिगेशन (Delegation) - काम सौंपना
एक उद्यमी की सबसे बड़ी बाधा यह होती है कि
"मुझसे बेहतर कोई नहीं कर सकता।"
80%
नियम: अगर कोई दूसरा व्यक्ति उस काम को आपकी तुलना में 80% भी सही कर सकता है, तो वह काम उसे सौंप दें।
यह आपको बड़े निर्णयों (Big Picture) पर ध्यान देने का समय देता है।
8.4 संघर्ष और सुरक्षा (Psychological Safety)
एक अच्छी टीम में लोग अपनी राय रखने से डरते
नहीं हैं।
गलती की अनुमति: अगर कर्मचारी गलती करने पर
डांट खाने से डरेंगे, तो वे कभी नए प्रयोग नहीं करेंगे। एक
ऐसा माहौल बनाएं जहाँ "सीखना" सजा से ज्यादा महत्वपूर्ण हो।
FAQS
यहाँ "The Personal MBA" के मुख्य सिद्धांतों पर आधारित कुछ
महत्वपूर्ण FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न) दिए गए
हैं। ये प्रश्न आपको पूरे बिजनेस मॉडल को संक्षेप में समझने में मदद करेंगे:
बिजनेस की बुनियादी समझ (General Business FAQs)
1. क्या बिजनेस शुरू करने के लिए MBA की डिग्री जरूरी है? नहीं। बिजनेस असल में एक मानवीय कौशल (Human Skill) है। यदि आप वैल्यू क्रिएशन, मार्केटिंग, सेल्स और फाइनेंस के बुनियादी
सिद्धांतों को समझते हैं, तो
आप बिना किसी औपचारिक डिग्री के भी एक सफल बिजनेस खड़ा कर सकते हैं।
2. एक सफल बिजनेस के 5 सबसे जरूरी हिस्से कौन से हैं? किसी भी बिजनेस के लिए ये 5 स्तंभ अनिवार्य हैं:
वैल्यू क्रिएशन: कुछ ऐसा बनाना जिसकी लोगों को
जरूरत हो।
मार्केटिंग: लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचना।
सेल्स: लोगों का विश्वास जीतना और लेनदेन पूरा
करना।
वैल्यू डिलीवरी: जो वादा किया है उसे समय पर और
अच्छी क्वालिटी के साथ पूरा करना।
फाइनेंस: यह सुनिश्चित करना कि बिजनेस मुनाफा
कमा रहा है।
मार्केटिंग और सेल्स (Marketing & Sales FAQs)
3. 'विशेषता' (Feature) और 'लाभ' (Benefit) में क्या अंतर है?
विशेषता: यह बताता है कि आपका प्रोडक्ट क्या है
(जैसे- फोन में 5000mAh बैटरी है)।
लाभ: यह बताता है कि ग्राहक की समस्या कैसे हल
होगी (जैसे- आपको दिन भर फोन चार्ज करने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी)। लोग हमेशा लाभ
खरीदते हैं।
4. मार्केटिंग में 'अटेंशन' (Attention) को मुद्रा क्यों माना जाता है? आज के समय में लोगों के पास जानकारी बहुत ज्यादा है और समय कम। यदि
आप किसी का ध्यान (Attention)
नहीं
खींच सकते, तो आप उसे कुछ भी समझा या बेच नहीं
सकते। इसलिए अटेंशन ही आज की सबसे कीमती करेंसी है।
5. ग्राहक के 'न' कहने का सबसे बड़ा कारण क्या होता है? अक्सर इसके पीछे 4 कारण होते हैं: पैसा (महंगा है), समय (अभी नहीं चाहिए), जरूरत (काम चल रहा है), या विश्वास (पता नहीं यह काम करेगा या
नहीं)। एक अच्छा सेल्सपर्सन इन चारों बाधाओं को पहले ही भांप लेता है।
मनोविज्ञान और उत्पादकता (Psychology & Productivity FAQs)
6. 'लॉस एवर्जन' (Loss Aversion) क्या है और यह बिजनेस में कैसे काम आता है? इंसानी दिमाग में कुछ खोने का गम, कुछ पाने की खुशी से ज्यादा बड़ा होता
है। मार्केटिंग में इसका उपयोग करके आप ग्राहक को यह दिखा सकते हैं कि आपके
प्रोडक्ट का इस्तेमाल न करने से उनका क्या नुकसान हो रहा है।
7. बिजनेस मालिक के लिए 'मल्टीटास्किंग' नुकसानदेह क्यों है? जब हम एक साथ कई काम करते हैं, तो दिमाग को एक काम से दूसरे पर स्विच करने में ऊर्जा खर्च करनी पड़ती
है (Cognitive
Switching Penalty)। इससे काम की क्वालिटी गिरती है और समय ज्यादा बर्बाद होता है।
फाइनेंस और सिस्टम (Finance & Systems FAQs)
8. प्रॉफिट और कैश फ्लो में क्या अंतर है?
प्रॉफिट: यह कागजों पर दिखने वाला मुनाफा है
(कमाई घटा खर्चे)।
कैश फ्लो: यह वह असल नकदी (Cash) है जो आपके बैंक खाते में उस समय मौजूद
है। कई बार प्रॉफिट होने के बावजूद बिजनेस बंद हो जाते हैं क्योंकि उनके पास सैलरी
देने के लिए कैश नहीं होता।
9. 'डेलिगेशन' (Delegation) का 80%
नियम
क्या है? यदि कोई दूसरा व्यक्ति किसी काम को
आपसे 80% बेहतर या सही तरीके से कर सकता है, तो वह काम उसे सौंप (Delegate) देना चाहिए। इससे आपका समय उन बड़े
निर्णयों के लिए बचता है जिन्हें आपके अलावा कोई और नहीं कर सकता।
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