Thursday, August 18, 2022

IGNOU MSO 004 Solved Assignment 2022-23

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MSO 004 Solved Assignment 2022-23

FREE IGNOU MSO 004 Solved Assignment 2022-23, students can directly done their assignment by simply take reference through our free ignou service.  MSO 004 Free solved assignment available here.

Answer any five questions selecting at least two from each of the sections.

 Your answers should be in about 500 words each.

SECTION -1

1. Describe and discuss the socio-historical background of the emergence of Sociology in India.

2. Discuss with suitable examples the major research trends in Sociology in India.

3. Define the concept of caste and discuss the colonial perspective on caste with suitable examples.

4. Explain with examples the forces of social and technological changes that impact the family institution in India.

5. Distinguish between North Indian and South Indian kinship system

SECTION - 11

6. What are the major agrarian classes in India? Discuss with reference to the contributions of different Sociologists.

7. Discuss the main features of middle class in India with suitable examples.

8. Discuss critically the concepts of caste, class and gender in India.

9. How does migration affect the rural and urban societies both during a social or natural disaster like an epidemic or earthquake.

 

10. Write short notes on any two of the following:

a) Concept of urban and urbanism

b) Globalisation in India

c) Social movements: Old and New

d) Social change and its impact on marriage pattern in India.

 


MSO 004 Handwritten Assignment 2022-23

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Important Note - You may be aware that you need to submit your assignments before you can appear for the Term End Exams. Please remember to keep a copy of your completed assignment, just in case the one you submitted is lost in transit.

Submission Date :

  • ·        31st March 2023 (if enrolled in the July 2022 Session)
  • ·       30th Sept, 2023 (if enrolled in the January 2023 session).

IGNOU Instructions for the MSO 004 Assignments

MSO 004 SOCIOLOGY IN INDIA Assignment 2022-23 Before attempting the assignment, please read the following instructions carefully.

1. Read the detailed instructions about the assignment given in the Handbook and Programme Guide.

2. Write your enrolment number, name, full address and date on the top right corner of the first page of your response sheet(s).

3. Write the course title, assignment number and the name of the study centre you are attached to in the centre of the first page of your response sheet(s).

4Use only foolscap size paper for your response and tag all the pages carefully

5. Write the relevant question number with each answer.

6. You should write in your own handwriting.

GUIDELINES FOR IGNOU Assignments 2022-23

MSO 004 Solved Assignment 2022-23 You will find it useful to keep the following points in mind:

1. Planning: Read the questions carefully. Go through the units on which they are based. Make some points regarding each question and then rearrange these in a logical order. And please write the answers in your own words. Do not reproduce passages from the units.

2. Organisation: Be a little more selective and analytic before drawing up a rough outline of your answer. In an essay-type question, give adequate attention to your introduction and conclusion. The introduction must offer your brief interpretation of the question and how you propose to develop it. The conclusion must summarise your response to the question. In the course of your answer, you may like to make references to other texts or critics as this will add some depth to your analysis.

3. Presentation: Once you are satisfied with your answers, you can write down the final version for submission, writing each answer neatly and underlining the points you wish to emphasize.

IGNOU Assignment Front Page

The top of the first page of your response sheet should look like this: Get IGNOU Assignment Front page through. And Attach on front page of your assignment. Students need to compulsory attach the front page in at the beginning of their handwritten assignment.

ENROLMENT NO: …………………………………………………….

NAME: ……………………………………………………………………

ADDRESS: ………………………………………………………………

COURSE TITLE: ……………………………………………………...

ASSIGNMENT NO: …………………………………………………

STUDY CENTRE: …………………………………………….……..

DATE: ……………………………………………………………………

MSO 004 Handwritten Assignment 2022-23

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Let’s see all these subjects-

MEG Solved Assignment 2022-23

MSO 001 Solved Assignment 2022-23

MSO 004 Solved Assignment 2022-23

BEGAE 182 Solved Assignment 2022-23

 

PDF & Handwritten

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Friday, September 17, 2021

सामान्य संपदा संसाधनों" से आप क्या समझते हैं?

सामान्य संपदा संसाधनों" से आप क्या समझते हैं?

 

"सामान्य संपदा संसाधनों" से आप क्या समझते हैं?

सहकारिता का विचार हमारे देश में आज से लगभग १०० वर्ष पूर्व अपनाया गया तथा महसूस किया गया था कि इसके द्वारा अनेक ग्रामीण तथा शहरी समस्याओं को हल किया जा सकेगा।  देश को स्वतंत्र हुए ५७ वर्ष हो चुके हैं, परन्तु सहकारिता के संबंध में हमारी उपलब्धियां केवल आलोचनाओं एवं बुराइयों तक ही सीमित रह गयी हैं, जबकि लक्ष्य इसके विपरीत था।  आखिर ऐसी कौन सी बात है जिससे हमें यह प्रतिफल दिखाई दे रहा है।  सन १९०४ में सर्वप्रथम यह विचार अपनाया गया।  उस समय देश परतंत्र था।  अत: विदेशी शासकों नए अपने हितों को ध्यान में रखकर इसे ज्यादा पनपने नहीं दिया।  परन्तु स्वतंत्रता प्राप्ती के बाद हमारे देशवासियों को ही यह कार्य-भार सौंपा गया।  फिर भी अभी तक अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हो सके हैं।  अत्: इस पर गम्भीरता से विचार करने कि आवश्यकता है।  सर्वप्रथम तो यह तय करना होगा कि सहकारिता को वास्तविक रूप से हम ग्रामीण जीवन में उतारना चाहते हैं या घोषणा पत्रों तथा सरकारी एवं सहकारी दिखावे के रूप में इसे कार्यालयों तक ही सीमित रखना चाहते हैं।  वास्तव में सहकारिता कोई सैधांतिक बात नहीं है, बल्कि इसका गहरा संबंध तो सामान्य व्यक्ति कि भावना से है जहां निश्चित रूप से यह अपने उद्देश्यों में सफल हो सकती है।

उपभोक्ता माँग को, यहाँ विचारणीय नहीं माना जाता। लोक चयन सिद्धांत कहता है कि उपभोक्ता की मांग को किसी लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रक्रिया के। माध्यम से प्रकाश में लाया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए किसी भी लोकतंत्र में नागरिक अपना अधिमान व्यक्त करने के लिए सार्वजनिक वस्तुओं/सेवाओं की प्रमात्रा के पक्ष में अथवा विपक्ष में सुस्पष्ट रूप से मत दे सकते हैं। माध्यिका मतदाता चयन के अधिमान को माँग की पहचान स्वीकार किया जाता है। बहरहाल, स्थानीय सरकार द्वारा प्रदत्त सार्वजनिक वस्तुओं/सेवाओं के प्रत्येक समूह हेतु 'माध्यिका मतदाता चयन शात करना दुष्कर अथवा महंगा हो सकता है। इसके अलावा, प्रतिनिधिक लोकतंत्र में. निर्वाचित राजनीतिज्ञ, जो सार्वजनिक वस्तू/सेवा प्रावधान की प्रमात्रा चुनते हैं. शायदा जनता की पसंद प्रकट न कर पाते हों। फिर भी स्थानीय सरकारें एक लंबे समय से स्थानीय सार्वजनिक वस्तुएँ (एवं सेवाएं प्रदान करती आ रही हैं. उनके चयन काफी हद तक राजनीतिक एवं नौकरशाही व्यवस्था के नियंत्रण को ही व्यक्त करते हैं। इस प्रकार, यहाँ 'नागरिक-उपभोक्ता चयन की व्याख्या का अभाव दृष्टिगत होता है। टाइबाउट इसकी व्याख्या निम्नवत् प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं। 6.2.1 टाइबाउट मॉडल टाइबाउट का मानना था कि सार्वजनिक वस्तुओं संबंधी उपभोक्ता के अधिमान/चयन का स्थानीय सरकारों के किसी प्रतिस्पर्धी महानगरीय बाजार- के माध्यम से प्रग्रहण किया जा सकता है। उक्त विद्वान के पास स्थानीय सार्वजनिक वस्तुओं पर व्यय का स्तर निर्धारित करने हेतु एक 'बाजार सरीखा समाधान है। इसके लिए. वह मसोवसैम्युल्सन के विश्लेषी प्राधार को आगे बढ़ाते हैं। सार्वजनिक वस्तुओं के प्रति मसोवसैम्युल्सन के दृष्टिकोण में मुख्य मुद्दा है - 'उस क्रियाविधि का अभाव' जिसके द्वारा सार्वजनिक वस्तुओं हेतु उपभोक्ता अधिमान मापे जा सकें। ऐसा इसलिए है कि बुद्धि संपन्न उपभोक्ता वर्ग कम कर चुकाने के लिए वस्तुओं के लाभ विषयक अपने अधिमान कम करके बता सकता है। टाइबाउट का सरोकार इन उपभोक्ता अधिमानों को 'सहीसही उजागर करवाने से ताल्लुक रखता है ताकि वह निजी वस्तुओं के उपभोग की भाँति संतुष्ट महसूस कर सकें। इससे उस पर तदनुसार ही कर लगाया जा सकेगा। टाइबाउट का सिद्धांत कुछ अवधारणाओं पर आधारित है।

हमारे देश के सर्वागीण विकास कि दो प्रमुख धाराएँ हैं

() ग्रामीण विकास () शहरी विकास।  ग्रामीण विकास का सम्बन्ध देश कि ७० प्रतिशत जनसंख्या से है, जबकि शहरी विकास ला सम्बन्ध देश की ३० प्रतिशत जनसंख्या से है।  यातायात एवं संचार की सुविधाओं नए देश में शहरीकरण को बहुत अधिक प्रोत्साहित किया है।  हर व्यक्ति किसी किसी बड़े शहर में रहना चाहता है, भले ही वहां का जीवन कष्टपूर्ण हो।  अत्: हमें विकास की दिशा को पूर्णत: ग्रामीण क्षेत्रों की ओर मोड़ना होगा, और इस कार्य के अंतर्गत  हमें गाँवों में शहरीकरण को प्रोत्साहन देना होगा, अर्थात वे सब सुविधाएँ जिनके कारण व्यक्ति गाँवो से शहर की ओर भाग रहा हैगाँवों  में उपलब्ध करनी होगी।  इस महत्वपूर्ण कार्य को सहकारिता के माध्यम से ही संपन्न किया जा सकता है।  गाँधी जी भी कहा करते थे : “बिना सहकार नहीं उद्धार

Thursday, September 16, 2021

1950-60 के दशक में भारतीय समाजशास्त्रियों का मुख्य केंद्रबिंदु विलेज इडिया था

1950-60 के दशक में भारतीय समाजशास्त्रियों का मुख्य केंद्रबिंदु विलेज इडिया था

 

1950-60 के दशक में भारतीय समाजशास्त्रियों का मुख्य केंद्रबिंदु विलेज इडिया था

हम शुरुआत करते हैं कुछ सुझावों से जो प्रायः आप जैसे युवा विद्यार्थियों के सम्मुख रखे जाते हैं। एक सुझाव प्रायः दिया जाता है कि 'मेहनत से पढ़ाई करोगे तो जीवन में सफलता पाओगे।' दूसरा सुझाव यह होता है कि 'यदि आप इस विषय अथवा विषयों के समूह की पढ़ाई करेंगे तो भविष्य में अच्छी नौकरी मिलने की ज्यादा संभावना रहेगी।' तीसरा सुझाव इस प्रकार हो सकता है कि 'किसी लड़के के लिए यह विषय ज्यादा उपयुक्त नहीं दिखता' अथवा 'एक लड़की के तौर पर क्या आपके विषयों का चुनाव व्यावहारिक है?' चौथा सुझाव, 'आपके परिवार को आपकी नौकरी की शीघ्र आवश्कता है तो ऐसा व्यवसाय चुनें जिसमें बहुत ज्यादा समय लगता हो' अथवा 'आपको अपने पारिवारिक व्यवसाय में कार्य करना है तो आप इस विषय को पढ़ने की इच्छा क्यों रखते हैं?'

सुझावों का खंडन करता है? क्योंकि पहला सुझाव दर्शाता है कि यदि आप कठिन परिश्रम करेंगे, तो आप अच्छा कार्य करेंगे और अच्छी नौकरी पाएँगे। इसका दारोमदार स्वयं पर है। दूसरा सुझाव यह दर्शाता है कि आपके व्यक्तिगत प्रयास के अलावा नौकरी का एक बाज़ार है और वह बाज़ार यह निश्चित करता है कि किस विषय की पढ़ाई करने से नौकरी के अवसर ज्यादा हैं या कम है। तीसरा और चौथा सुझाव इस विषय को और भी जटिल बना देता है। यहाँ केवल हमारे व्यक्तिगत प्रयास और नौकरी का बाजार ही नहीं बल्कि लिंग, परिवार और सामाजिक परिवेश भी मायने रखते हैं। यद्यपि व्यक्तिगत प्रयासों का बहुत अधिक महत्त्व है लेकिन यह आवश्यक नहीं कि वे परिणाम को निश्चित करें। जैसाकि हम देखते हैं कुछ अन्य सामाजिक कारक भी हैं जो परिणाम को निर्धारित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हमने केवल 'नौकरी का बाज़ार', 'सामाजिकआर्थिक पृष्ठभूमि' एवं 'लिंग' का जिक्र किया है।

मोहनदास करमचंद गांधी ने 12 मार्च 1930 को  salt Satyagraha यानी कि नमक का कानून तोड़ा था।  ब्रिटिश सरकार ने भारत के लोगों को नमक बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया था, इसके कारण गांधी जी इसके खिलाफ  थे। नमक एक ऐसा पदार्थ है जो अमीर से लेकर गरीब के उपयोग में आता है। उस समय गरीब लोगों को कर ( tax ) के कारण अधिक नुकसान हुआ करता था। इसलिए गांधी जी ने निश्चय किया कि अब वह नमक के ऊपर का कानून तोड़ेंगे। महात्मा गांधी और उनके साथ 78 अनुयायियों  ने 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से था तट तक 390 किलोमीटर तक चल कर नमक का कानून तोड़ा था। यह salt Satyagraha के नाम से प्रसिद्ध हुआ था।

यात्रा के दौरान दिन भर  दिन लोगों की संख्या बढ़ती ही जा रही थी, 5 अप्रैल को जब गांधी जी दांडी पहुंचे तब हजारों लोगों की भीड़ के मुख्य बन चुके थे। सभी लोगों ने साथ मिलकर दूसरे दिन  सुबह के समय समुद्र के तट पर नमक बनाया और नमक का कानून तोड़ा था। साबरमती आश्रम से दांडी तक पहुंचने के लिए उन्हें लगभग 25 दिन लगे थे।

1930 के समय में महात्मा गांधी ने ब्रिटिश सरकार से स्वतंत्रता दिलाने के लिए आंदोलन शुरू किया था। यह आंदोलन स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए सबसे बड़े जन आंदोलनों में से एक था। 1929 लाहौर में जब कांग्रेस ने ब्रिटिश सरकार से पूर्ण स्वराज की मांग की थी तब ब्रिटिश सरकार ने उनकी मांगें स्वीकार नहीं की थी। इसी कारण से स्वाधीनता प्राप्ति के लिए महात्मा गांधी जी ने 12 मार्च 1930 को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ जन आंदोलन की शुरुआत की थी। यह आंदोलन salt Satyagraha के नाम से प्रचलित हुआ।

यह आंदोलन का मुख्य उद्देश्य नमक का कानून तोड़ना था, क्योंकि ब्रिटिश सरकार ने भारतीय लोगों को नमक बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। नमक एक ऐसा पदार्थ है जो मनुष्य को भोजन के लिए बहुत ही अनिवार्य होता है। ब्रिटिश कानून ने इसके ऊपर कर लगाया तो गरीब लोगों को काफी ज्यादा नुकसान होता था। यहां से की शुरुआत हुई थी।